इस दुनिया में
किसी के लिए मैं
एक जोड़ी आँखें हूँ
सुनयना-कमलनयना
जिसकी पिघली गहराई में
वह डूब उतरा सकता है
तो किसी के लिए
एक सुंदर देह
कामिनी-प्रिया
चिरंतन आकर्षण
जिसकी चाहना में वह
खुद को निसार सकता है
और किसी के लिए
तना हुआ गर्वोन्नत सर
अहम् अभिमान अनाकर्षक मेधा
जिसे नीचा दिखाने का लक्ष्य
उसे लुभा सकता है
इसी तरह सबने मुझे
टुकड़ों में बाँट रखा है
व्यक्तित्वहीन देहांशों में
समग्रता में मुझे इंसान की तरह
कोई नहीं स्वीकारता
समग्रता में मुझे इंसान की तरह
कोई नहीं चाहता।

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