‘लव जिहाद’ के शोर के पीछे इनका मकसद तो ‘हिंदुओं का खून खौलाना’ ही होता है! मगर ऐसा करते हुए इनको ध्यान नहीं रहता कि ये अपनी ही बहन-बेटियों को भोली और मूर्ख घोषित कर देते हैं! क्या सचमुच हिंदू लड़कियां इतनी भोली होती हैं कि कोई इनको ‘फंसा’ लेता है! वैसे तो बड़े गर्व से कहते हैं कि आज की स्त्री (ऐसा हिंदू स्त्रियों के बारे में ही कहा जाता है) हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही है. वह प्रशासन से लेकर सेना में अपनी काबीलियत साबित कर रही है, कि अंतरिक्ष में जा रही है, कला की दुनिया से लेकर बिजनेस में भी मुकाम हासिल कर रही है! फिर भी ऐसी भोली होती हैं कि कोई विधर्मी उसे अपने जाल में फंसा लेता है, उसका धर्मांतरण तक करवा देता है!
क्यों, कोई हिंदू लड़की अपनी मर्जी से किसी भिन्न समुदाय के युवक से दोस्ती नहीं कर सकती? कर सकती है, मगर यह आपको पचता नहीं है! सच यह है कि आपको उसका किसी हिंदू युवक (यदि वह भिन्न जाति का है तो) से दोस्ती-प्रेम और विवाह करना भी नहीं पचता है! बल्कि अपनी पसंद का-स्वजातीय ही सही- जीवन साथी चुनना भी नहीं पचता है. परिवार की कथित प्रतिष्ठा बचाने के लिए अपनी ही बहन-बेटी की हत्या के जितने मामले सामने आते हैं, उनमें अधिकतर तो अन्तर्जातीय प्रेम संबंधों के ही होते हैं!      
अभी इस बात को रहने देते हैं! मान लीजिए कि किसी हिंदू लड़के की दोस्ती किसी मुस्लिम लड़की से हो गई, तब भी यही कहेंगे कि वह उस लड़की के जाल में फंस गया! यानी हिंदू युवक भी उतना ही बेवकूफ होता है! इसे तो ‘विजय’ के रूप में लेना चाहिये! लेते भी हैं, गड़बड़ तब होती है, जब हिंदू युवक ऐसे रिश्ते के कारण या बाद में धर्म बदल लेता है! लेकिन धर्म बदलने का अधिकार तो संविधान देता है, इसमें हमेशा ‘साजिश’ देखना जरूरी है?
अभी ऐसा ही एक मामला- शामली (उत्तर प्रदेश) आयुष मलिक और चांदनी कुरैशी के निकाह का- चर्चा में है. निकाह के बाद करोड़पति परिवार के आयुष मलिक ने इस्लाम धर्म अपना लिया. नाम मोहम्मद अली रख लिया! और यह ‘राष्ट्रीय मुद्दा’ बन गया! आयुष के परिवार ने आरोप लगाया कि उसका ब्रेनवाश किया गया है, यह भी कि चांदनी कुरैशी की नजर उसकी संपत्ति पर है! इस बीच देवराज मलिक की शिकायत पर पुलिस चांदनी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को जेल भेज चुकी है. चांदनी के भाई और बहनों के खिलाफ भी केस दर्ज है. चांदनी पेशे से फिजियोथैरेपिस्ट और जिम ट्रेनर बताई जाती है. साल 2018 में आयुष मलिक के पैर में फ्रैक्चर हो गया. इलाज के लिए उसे शामली के सृष्टि अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहीं उसकी मुलाकात चांदनी कुरैशी से हुई. और धीरे धीरे दोनों करीब होते गये.  
चांदनी के जेल जाने के बाद आयुष या अली ने सामने आकर कहा कि मुझ पर कोई दबाव नहीं है, मैंने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया है और परिवार चाहे तो मुझे संपत्ति से बेदखल कर दे! लेकिन बात खत्म नहीं हुई. क्योंकि ‘हिंदू हितैषियों’ के लिए यह हिंदू धर्म और समाज के खिलाफ साजिश का मामला है! पुलिस का रवैया भी उनके अनुकूल लगता है! एसपी साहब ने मीडिया से कहा कि आयुष पाकिस्तान के किसी मौलाना के संपर्क में रहा है, इसकी जांच हो रही है! हालांकि जिस मौलाना डॉ. इसरार अहमद का जिक्र वह कर रहे थे, उनका निधन 2010 में हो चुका है!
नेट पर विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक-
जब पत्रकारों ने आयुष से पूछा कि क्या चांदनी ने आपकी करोड़ों की संपत्ति के लालच में निकाह किया है तो वह भड़क गये. कहा- ‘चांदनी पिछले सात सालों से एक ही फोन इस्तेमाल कर रही है. वह अपने आपको हमेशा पर्दे पर रखती थी. उसका एक बाल तक नहीं दिखता था, लेकिन आप लोगों ने उसे नंगा करके रख दिया है.’
आयुष ने कहा कि वह चार साल पहले ही चांदनी से निकाह कर चुके थे पर साथ में नहीं रहते थे. अब जब उन्हों ने चांदनी के साथ रहने की बात की तो उनके घरवाले नाराज हो गये. आयुष का कहना है कि वह केवल चांदनी से निकाह करने के लिए मुसलमान नहीं बने हैं. वह बहुत पहले से मुस्लिम धर्म से प्रभावित थे. फिर धीरे-धीरे इस्लाम को समझा और आत्मसात किया. वह पाकिस्तान के इस्लामी विद्वान डॉ इसरार अहमद के वीडियो यूट्यूब पर देखा करते थे. उन्हें उनका भाषण बहुत अच्छा लगा. डॉ इसरार की बात ज्यादा लोग काटते नहीं हैं.’
मीडिया वालों ने पूछा कि जब आपने 12 साल पहले इस्लाम  धर्म अपना लिया था तो सबको बताया क्यो नहीं? इस पर आयुष ने बताया कि उसके घरवालों को डर था कि बात सामने आने पर उनकी बहनों की शादी होने में दिक्कत आएगी. इसलिए ये बात समाज से छिपा कर रखी. आयुष मलिक का साफ कहना है कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया है. अब उन पर हिंदू धर्म में वापसी करने का दबाव बनाया जा रहा है. वह किसी भी हालत में अपने पुराने धर्म में वापस नहीं लौटेंगे.
धर्म निजी आस्था का विषय है, उसी तरह किसके साथ दोस्ती करनी है या विवाह करना है- यह निर्णय दो वयस्क लोगों का निजी मामला है! लेकिन… धर्म के नाम पर राजनीति और धंधा करने वालों के लिए ऐसे निजी मामलों और उनकी भावनाओं की कोई कीमत नहीं है!
एक सच यह भी है कि एक विवाहित हिंदू पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करना चाहे, तो उसके पास एक ही रास्ता रहता  है- इस्लाम ग्रहण कर ले! ऐसा होता भी रहा है और कोई शोर भी नहीं होता! धर्मेंद्र-हेमा मालिनी प्रकरण ज्वलंत उदाहरण है!
बेशक धर्मांतरण यदि किसी लोभ या साजिश के तहत हुआ है, तो जांच होनी चाहिए, दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी. मगर हर प्रेम प्रसंग और धर्मांतरण में साजिश सूंघना जरूरी है?
लेकिन यह ‘नया भारत’ है- कुछ भी हो सकता है, वह भी ‘स्वर्णकाल’ और ‘योगीराज’ में!  

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