हम दहेज हत्या पर इतना हो हल्ला मचाते हैं, पर क्या कभी सोचा है की दहेज हत्या के गुनहगार सिर्फ ससुराल वाले नहीं लड़की के घर वाले और यह पूरा समाज भी जिम्मेवार होता है।
शादी के बाद जब लड़कियां अपने घर वालों को अपनी स्थिती बताती है तो हर बार उन्हें यही सुनने को मिलता है की एडजस्ट करो। कल सब ठीक हो जाएगा। और जब कल लड़की की मौत हो जाती है तो हो हल्ला मचाते हैं। कई बार तो वे खुद ससुराल पक्ष से सौमझौता कर के बैठ जातें हैं।
सिर्फ दहेज के कारण हीं नहीं, कई बार तो प्रेम-विवाह में भी लड़कियों की उसके प्रेमी द्वारा हत्या कर दी जाती है। और अगर हत्या नहीं भी होती है तो भी लड़की को मार पिटाई सहनी पड़ती है। मैने खुद ऐसे केसेज देखें हैं की लड़की नौकरी करती है फिर भी घर में पति द्वारा पिटती है और सूजा हुआ चेहरा लेकर ऑफिस जाती हैं और सहकर्मियों के पूछने पर कभी बाथरुम में गिर जाने की, तो कभी रसोई में फिसल कर गिर जाने का बहाना बनातीं है। हमारा पति हमें पीटता है यह बात किसी से कहने में भी तो शर्म आती है। जैसे गुनहगार वो खुद हो। कई बार लड़कियां शिकायत लेकर मैके जाती भी है तो उन्हें सुनना पड़ता है की शादी तो तुमने अपनी मर्जी से की थी फिर अब क्या हुआ।
जैसे अगर उन्होने अपनी मर्जी से शादी नहीं की होती तब तो उसे अपने पास रख लेते। स्थिती जितनी दिखती है उससे कहीं ज्यादा खराब है। दहेज निरोधक कानून बने हैं पर जमीन पर तो खुद कानून बनाने वाले उसे अमल करवाने वाले हीं दहेज लेतें हैं, फिर कोई जाए तो कहां जाए।

प्रातिक्रिया दे

Trending