दुमका में हुई बलात्कार की घटना ने आदिवासी समाज को आलोड़ित कर दिया है. बलात्कार तो इस संथाल बहुल इलाके में लगातार हो रहे हैं. और विगत कुछ दशकों से हो रहे हैं. जहां की यह घटना है, वहीं हाल के दिनों में तीन घटनाएं हो चुकी है. एक युवा महिला के साथ बलात्कार कर उसे वहीं नदी के आसपास फेंक दिया गया. एक चार वर्ष की लड़की बलात्कार की शिकार हुई.
जाहिर है, इन बातों से आदिवासी समाज उद्वेलित है. स्कूल की छात्रायें खास कर डरी हुई हैं और पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ सड़कों पर उतरी. पुलिस भी जन आंदोलन के दबाव के बाद सक्रिय हुई और एक अभियुक्त पकड़ा गया. वह भी आदिवासी समाज का ही है और तीन चार बच्चे का पिता है. लोगों को थोड़ी सांत्वना मिली और अब मांग शुरु हो गयी है उसे फांसी पर लटकाने की. या चौराहे पर खड़ा कर मार डालने की. यह अपराध सचमुच हृदय विदाकर है.
लेकिन थोड़ा संयम बरते. समझ से काम लें. पुलिस का काम अपराधी को पकड़ना और साक्ष्य जुटाना और अभियुक्त को अदालत के समक्ष पेश करना है. यदि वह साक्ष्यों के आधार पर अपराधी सिद्ध हुआ तो कानून की धाराओं के तहत उसे सजा सुनानी है.
बगैर उत्तेजित हुए जरा इस पहलु पर भी विचार कर लीजिये कि क्या यह जरूरी है कि वह व्यक्ति ही अपराधी हो? हो सकता है कि जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आनन फानन एक व्यक्ति को पकड़ लिया हो और पुलिस के डर से तो कोई भी अपराध स्वीकार कर ले सकता है. मैं यह नहीं कहता कि वह अपराधी नहीं है. हो सकता है कि उसने ही यह जघन्य अपराध किया हो. लेकिन यह तो कोर्ट ही साक्ष्यों के आधार पर तय करेगी.
लेकिन इस बात की गुंजाईश हमेशा रहती है कि जिसे अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी, वह बाद में निर्दोंष निकला. अब यदि किसी को फांसी की सजा दे दी गयी और बाद में वह निर्दोष निकला तो इस गलती का सुधार कैसे होगा? इसके अलावा हम इस बाद को प्रत्यक्ष देख रहे हैं कि कड़े से कड़े कानूनी प्रावधानों और सजा के बावजूद इस तरह के अपराध रुक नहीं रहे.
इस प्रकरण में तो सबसे ज्वलंत सवाल यह है कि जिस आदिवासी समाज में बलातकार की घटनाएं विरल और कल्पनातीत थीं, उस आदिवासी समाज में इतनी बलात्कार की घटनाएं क्यों होने लगी हैं? ‘आदिवासी समाज’ का चाल चरित्र ‘दिकू समाज’ की तरह क्यों होता जा रहा है?
पहले भी आदिवासी लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हुआ करती थी, लेकिन सामान्यतः बलात्कारी या दुराचार करने वाला बहिरागत होता था. अब तो बलात्कार की अधिकतर घटनाओं में आदिवासी ही बलात्कारी पाये जा रहे हैं? आदिवासी समाज और जीवन में यह बदलाव कैसे आ रहा है? इसकी क्या वजह है? कही यह तो नहीं कि हम जिससे लड़ते हैं, जिसका विरोध करते हैं, धीरे-धीरे उसी के जैसा बनते चले जाते हैं?
जान लीजिये कि अंतिम रूप से यह कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, समाज की समस्या है. इसका समाधान समाज ही निकाल सकता है.

आदिवासी समाज में भी बलात्कार!
दुमका में हुई बलात्कार की घटना ने आदिवासी समाज को आलोड़ित कर दिया है. बलात्कार तो इस संथाल बहुल इलाके में लगातार हो रहे हैं. और विगत कुछ दशकों से हो रहे हैं. जहां की यह घटना है, वहीं हाल के दिनों में तीन घटनाएं हो चुकी है. एक युवा महिला के साथ बलात्कार कर…
2–3 minutes




प्रातिक्रिया दे