मोदी जी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल की भ्रूणहत्या हो गई है. या तो वे भ्रूणहत्या का अर्थ नहीं जानते या अपने संबोधन में एक भारी भरकम शब्द का प्रयोग कर महिलाओं को प्रभावित करना चाहते हैं. सारा देश देख रहा था कि वे महिला आरक्षण के बहाने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन बिल पारित कराना चाहते थे. महिला आरक्षण बिल 2023 में पूर्ण बहुमत से पास हो चुका है. इसके लिए संविधान में संशोधन कर 334 ए की धारा लगाई गई और उसमें स्पष्ट लिखा गया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. लेकिन इन्हीं की लगाई गयी शर्तों के अनुसार देश में जनगणना होने के बाद परिसीमन होना था और तब बढे हुए लोकसमा सीटों के आधार पर महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव के समय दिया जाता. फिर किस बात का यह हल्ला हो रहा है कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण कानून बनने नही दिया, उसकी हत्या भ्रूण में ही कर दी गयी.
भ्रूणहत्या शब्द का प्रयोग कर भले ही मोदी जी भावुक हुए हों और महिलाओं को बीजेपी को वोट देने के लिए मना लिया हो, लेकिन यह शब्द महिलाओं के लिए एक अपमानजनक शब्द है. यह महिलाओं को याद दिलाता है कि उसके गर्भ पर उसका अधिकार नहीं है. गर्भ में लड़की है जानकर उसे गर्भ में ही मार देने के लिए बाध्य किया जाता है. यह पुरुष सत्तात्मक समाज का असली चेहरा है. मोदी जी जिस तरह महिला आरक्षण बिल के साथ खिलवाड कर रहे हैं उससे तो साफ जाहिर है कि इस बिल को कार्यरूप में परिणत करने की उनकी इच्छा ही नहीं है. वे इसे अपने चुनावी प्रचार का एक हथियार बनाकर प्रयोग करते हैं.
अभी 2029 के चुनाव में तीन वर्ष हैं. सरकार चाहें तो जनगणना भी करा सकती है और परिसीमन भी. लेकिन सरकार की इच्छा ही नहीं है कि जाति आधारित जनगणना हो. इसके लिए विपक्षी दलों ने सुझाव दिया था कि वर्तमान 543 सीटों में से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे दिया जाया. वे उसका समर्थन करेंगे और महिला आरक्षण कानून बन जायगा. लेकिन सरकार अपने पुरुष सांसदों की संख्या घटा नहीं सकती है. बीजेपी सरकार विपक्षी दलों तथा महिलाओं को पहले से अपनी योजना की जानकारी दिये बिना चुनाओं के बीच विशेष सत्र बुलाकर अपने लिए उपयोगी बदलाव के द्वारा 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कराना चाहती थी. लेकिन विपक्षी सांसदों ने इसे विफल कर दिया. अब बीजेपी भ्रूणहत्या जैसे शब्द का प्रयोग कर महिलाओं के सामने अपने को महिलाओं का संरक्षक सिद्ध करना चाहती है.
बीजेपी सरकार चुनाव के समय महिलाओं को तरह-तरह की आर्थिक मदद देकर उनका वोट तो लेना चाहती है, लेकिन महिला आरक्षण के द्वारा संसद में महिलायें पुरुषों के बराबर बैठकर नीति निर्माण में सहयोग करे, यह वह कभी नहीं चाहती. अब तो लगता है कि 2029 में भी महिलाओं को आरक्षण मिलने वाल नहीं है. इसलिए महिलाओं के इस अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले विपक्षी दलों को चुनाव के समय महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देकर उन्हें संसद में लाना चाहिए.

महिला आरक्षण पर पाखंड कर रहे हैं मोदी जी
मोदी जी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल की भ्रूणहत्या हो गई है. या तो वे भ्रूणहत्या का अर्थ नहीं जानते या अपने संबोधन में एक भारी भरकम शब्द का प्रयोग कर महिलाओं को प्रभावित करना चाहते हैं. सारा देश देख रहा था कि वे महिला आरक्षण के बहाने 2011 की जनगणना के आधार पर…
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