आज अगर प्रतिदिन का अखबार उठा कर देखा जाए तो स्त्रियों के प्रति अपराध की खबरें सहज ही दिख जाती हैं। नव वर्ष का आगाज हुआ, लेकिन स्त्रियों के साथ घटित होने वाली आपराधिक घटनाओं की सूरत नहीं बदली। वर्ष के शुरुआत में, जनवरी महीने में ही पटना में जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा, जो पत्रकार नगर के शंभू गर्ल्स हास्टल में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी, वह 6 जनवरी 2026 को गर्ल्स हास्टल के कमरे में अचेतावस्था में पाई गई। जिसकी मृत्यु 11 जनवरी को इलाज के दौरान अस्पताल में हो जाती है।
आरंभ में कहा जाता है कि यह आत्महत्या का केस है। पुलिस ना तो उसकी मेडिकल टेस्ट करवाती है और ना ही कोई एफ आई आर दर्ज किया जाता है। जब घर वालों को पता चलता है तो वे इसे आत्महत्या मानने से इनकार कर देते हैं, और इसकी मेडिकल जाँच करवाने की जिद करते हैं। अखबारों में खबर आती है, तब कहीं प्रशासन जागता है।
खबर की जानकारी होने पर पटना की कुछ महिला संगठनों ने इसमें पहल की और उस लड़की का मेडिकल करवाया। मेडिकल जाँच के उपरांत लड़की के शरीर पर कई चोट के निशान मिले और उसके साथ बलात्कार की भी पुष्टि हो गई। घटना पर त्वरित न्यायिक कार्रवाई हो इसके लिए महिला संगठनों ने मिलकर पटना स्थित फ्रेजर रोड के बुद्ध स्मृति पार्क के पास एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने शामिल होकर महिलाओं के साथ होने वाले इस तरह के अपराधों के प्रति लोगों का ध्यान आकृष्ट किया और प्रशासन से संवेदनात्मक तरीके से काम करने का दवाब बनाने की कोशिश की।
सभी ने मिलकर एक स्वर में इस तरह की घटनाओं का विरोध किया और इसके खिलाफ नारे लगाए। महिला संगठनों की मांग थी कि  सरकार को इस तरह की घटनाओं के, बलात्कार और हत्या के लिए जिम्मेवार व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। अपने संबोधनों में महिलाओं ने सरकार से यह अपेक्षा की कि सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने का माहौल बनाएगी और घटना की पीड़िता को न्याय दिलाने का काम गंभीरता से करेगी।

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